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चंडीगढ़: मालवा क्षेत्र में गुलाबी सूंडी के आक्रमण से हुए फसलों के नुकसान की भरपायी की माँग का निवर्तमान भगवंत मान सरकार ने संज्ञान लिया है. बता दें कि मालवा क्षेत्र में ख़राब हुई नरमे की फ़सल का मानसा और बठिंडा में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने शत-प्रतिशत नुकसान के लिए 17 हज़ार रुपए प्रति एकड़ मुआवज़ा देने का आश्वासन दिया गया था जिसमें से 10 प्रतिशत मुआवज़ा राशि मज़दूरों को दिया जाना प्रस्तावित था. परंतु इन किसानों को कोई मुआवज़ा नहीं मिला. जिसके खिलाफ किसान जत्थेबंदियाँ की तरफ से ज़िला स्तर पर धरने प्रदर्शन कर रहे हैं. आज पंजाब के मुख्य मंत्री भगवंत मान मानसा जाकर इन किसानों और मज़दूरों को 58 करोड़ से ज्यादा की मुआवज़ा राशि बांटने मानसा जा रहे हैं.

उधर पंजाब किसान यूनियन के सूबा प्रधान रुलदू सिंह मानसा ने भगवंत मान की इस आगमन पर सवाल भी उठाए हैं उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान भी पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिह बादल और कैप्टन अमरिंदर सिंह की राह पर ही चल रहे हैं जबकि यह मुआवज़ा राशि किसानों को सीधे उनके खातों में जमा कराया जा सकता था, परन्तु मुख्य मंत्री भगवंत मान भी एक बड़े समागम करके फिजूल में सरकारी खजाने पर बोझ डाल रहे हैं.

गुलाबी सुंडी क्या है: गुलाबी सुंडी कपास की फसल को मध्यम, अंतिम अवस्था में नुकसान करने वाला कीट है. इस कीट की सुंडियां टिंडे के अंदर से अपना भोजन ग्रहण करती हैं. टिंडे खुलने के पश्चात गुलाबी सुंडी द्वारा भोजन किए हुए भाग के आसपास बीज, रुई की गुणवत्ता खराब हो जाती है और टिंडे भी पूरी तरह से नहीं खुलते. गुलाबी सुंडी के आक्रमण का टिंडे को बाहर से देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल है. पंजाब के मालवा क्षेत्र समेत हरियाणा और राजस्थान में कपास की फसल पर गुलाबी सुंडी ने अपना कहर बरपाया था. जिसके चलते अब तक तलवंडी साबो एरिया के अधीन आते विभिन्न गांवों मलकाना, कणकवाल, बंगी निहाल, बहमण जस्सा सिंह के किसानों ने गुलाबी सुंडी से बर्बाद हुई लगभग 50 एकड़ फसल को ट्रैक्टर से रौंद दिया था. तत्कालीन सरकार ने आश्वासन दिया था कि प्रभावित किसानों को और उनके मजदूरों को इसका मुआवजा दिया जाएगा.

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