धर्म-कर्म सतनाली

दीपावाली को सवार्थसिद्धि, सौभाग्य एवं स्वाति नक्षत्र का बन रहा विशेष संयोग

Spread the love
  • पूजन के लिए सांय 5:35 से 7:31 तक रहेगा श्रेष्ठ समय: पं. कृष्ण शर्मा

सतनाली मंडी, मिश्रा मनोज @ कानोड़ न्यूज । कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला दीपावली महापर्व आज मनाया जा रहा है। ज्योर्तिविद पं. कृष्ण कुमार शर्मा ने बताया कि दीपावली के दिन भगवान श्री गणेश जी एवं मां लक्ष्मी की पूजा की जाती हैजिसमें प्रदोष काल का बहुत महत्व है। दिन-रात के संयोग को प्रदोष काल कहा गया है जो करीब अढ़ाईघंटे का होता हैऔर पूजा के लिए अति शुभ होता है। उन्होंने बताया कि इस बार चतुर्दशी तिथि शनिवार को दोपहर 2:20 तक रहेगी जिसके बाद अमावस्या शुरु हो जाएगी।

पं. कृष्ण कुमार शर्मा ने बताया कि दीपावली पूजन के लिए वृष व सिंह लग्र पूजन के लिए श्रेष्ठ माने गए हैंजिसमें पूजा करने से धन, ऐश्वर्य व बुद्धि तथा आरोग्य की प्राप्ती होती है। उन्होंने बताया कि वृष लग्र स्थानीय समयानुसार सांय 5:35 से 7:31 तक रहेगा। उन्होंने बताया कि वृष लग्र में राहू होने से इस्पात, कोयला, इलेक्ट्रोनिक्स, पैट्रोलियम आदि कार्य करने वालों के लिए उपयुक्त है वहीं, सिंह लग्र रात्रि 12:07 बजे से मध्यरात्रि पश्चात् 2:24 तक रहेगा लग्र माना जाता है और यह लक्ष्मी के लिए पूजा कार्यों में श्रेष्ठ माना गया है। इसके अलावा दोहरे स्वभाव वाला मिथुन लग्र सांय 7:31 से रात्रि 9:46 तक रहेगा जो उद्योग, फैक्ट्री, दवा-विक्रेता, स्टोन क्रेशर आदि में पूजन के लिए शुभ समय है। उन्होंने बताया कि शनिवार को सुबह 8:11 से 9:30 तक शुभ का चौघडिय़ा, दोपहर 12:10 से 1:29 तक चल का चौघडिय़ा, दोपहर 1:29 से 2:49 बजे तक लाभ का चौघडिय़ा तथा दोपहर बाद 2:49 से सांय 4:08 बजे तक अमृत का चौघडिय़ा मुहूर्त रहेगा जिसमें शुरु किए गए कार्यों से धन-धान्य की वृद्धि होती है। उन्होंने बताया कि इस बाद दीपावली पर सवार्थसिद्धि, सौभाग्य एवं स्वाति नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदोष काल में स्वाति नक्षत्र रात्रि 8:10 बजे तक रहेगा जिसके बाद विशाखा नक्षत्र आरंभ हो जाएगा जो मनोरथपूर्ति की कामना हेतु शुभ माना गया है। उन्होंने बताया कि दीपावली पर स्वाति नक्षत्र चर और चल संज्ञक होने से उद्योग धंधे, दुकान एवं वाहन आदि कार्यों के लिए शुभ रहेगा।